कहूँ कैसे

एहसास अंतर्मन के  ############मेरी चुप को ना गर समझेज़ुबां से मैं कहूँ कैसेघुटा जाता है दम अब ,बिन कहे भी मैं रहूँ कैसेइश्क उनका ये मुझसे,हो सही उनकी इबादत भीतगाफुल  ,उस परस्तिश काजो की मैंने , सहूँ कैसे............................................... मायने... [पूरी पोस्ट]
writer roohshine
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[09 Jun 2010 07:34 AM]

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