मुख़्तसर लम्हा

एहसास अंतर्मन के बहुत शुरुआती दौर की रचना है..भावों को शब्दों में बंधना सीख रही थी.. कच्ची कच्ची सी रचना को आज थोड़ी सी आंच दे कर पकाने की कोशिश की है... जो भी कमी हो इंगित अवश्य करियेगा ...###############################देख रही हूँअनजान राहोंसे गुज़रतालम्हों काकारवाँकुछ... [पूरी पोस्ट]
writer roohshine
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[11 Jun 2010 14:44 PM]

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