सितम है

एहसास अंतर्मन के जीवन साँसों के उठने गिरने का क्रम हैयही है ज़िंदगी , दिल को क्यूँ यह भ्रम हैना झूमती शाखें हैं, ना महकते फूलऐसा जीना क्या उजड़ी बहार से कम है!जश्न है गुलशन में खिलती हुई कली काबिखरा मुरझा के गुल ,नहीं उसका गम है अश्क दिखते नहीं बहते मेरी निगाहों सेछुआ जब... [पूरी पोस्ट]
writer roohshine
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[12 Jun 2010 09:23 AM]

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