मौन की पौन
आज अर्जुन दिख रहा क्यों कौरवों के वेश में ।
क्यों दिशा से रहित वायु बह रही इस देश में ॥
श्मसान सा भोपाल को जिनने बनाया था कभी ।
अब भी उनको पालते अर्जुन हमारे देश में ॥
कौन है जो डस गया और सपेरा कौन है।
हर कोई सच जानता अब हमारे देश में ॥
घट गया वह बुरा था...
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प्रदीप मानोरिया
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[15 Jun 2010 10:35 AM]



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