बार-गर्ल.(शाब्दिक कोलाज)
ग़सक़* से ग़लस* तक का परिदृश्य...........।जाड़ों की बारिश मेंबार के निबिड़ अँधेरे मेंपछीते से,घुसते ही सड़ांध के झिझोड़ते हुए...
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Amitraghat
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[15 Jun 2010 10:30 AM]



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