मेरा आत्मसंघर्ष : मणिकुंतला भट्टाचार्य
असमिया की चर्चित लेखिका के सृजनात्मक सफर की दास्तां…
कौन जानता है कि आनंद की तुलना में विषाद क्यों गहरा स्थायित्व प्राप्त करता है! खुद नहीं जानती, कब विषादग्रस्तता ने सीने में जगह बना ली थी। दोनों हाथों में शिशु बनकर लटकती फिरी थी शून्यता और...
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[15 Jun 2010 09:13 AM]



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