निःशब्द नीड़

मनोज निःशब्द नीड़ -- करण समस्तीपुरी दिन भर दूर नीड़ से श्रम कर,चना-चबेना दाना चुन कर,सांझ पड़े खग आया थक कर,किन्तु यहाँ क्या पाया ?नीड़ देख निःशब्द,विहग का उर आतुर घबराया !!क्षुधा तृषित क्या सो गए परिजन,या फिर से आया कोई रावण ?पड़ीं नीड़ पर बाज की छाया,या... [पूरी पोस्ट]
writer करण समस्तीपुरी

करण समस्तीपुरी

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[15 Jun 2010 09:00 AM]

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