बेचारा बहुरंगी

यादों का इन्द्रजाल... Hindi Poetry by Sulabh अरे बेटी सुनैना ज़रा दो मिनट पास बैठना | पापा आज आप बहुत खुश दिख रहे हैं क्या कोई खुशखबरी है या मुझे देख हंस रहे हैं | तुम तो जानती हो बेटी तुम्हारे लिए वर की तलाश है और आज बात बहुत ख़ास है मैं मिलकर आया हूँ एक शख्स से नाम है उसका बेचारा बहुरंगी चेहरे से... [पूरी पोस्ट]
writer सुलभ § Sulabh
views
36
upvote
6
downvote
0
rating
6
comments
27
[15 Jun 2010 08:10 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix