vikram7
दिलीप जी ने कल अपनी टिप्पणी में कहा" kalam bhi chalaate rahiye sir... " चाहता तो मै भी यही हूँ,पर यह स्वास्थ साथ ही नही दे रहा। न कुछ लिख पाता हूँ,न दूसरो के ब्लॉग ही देख पाता हूँ। अपनी पुरानी दो लाइनो के माध्यम से यही कहूगा...... अर्थ हीन सम्वादों का...
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vikram7
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[15 Jun 2010 07:57 AM]



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