“भक्तों जोड़ो इनसे नाता” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
सुन्दर-सुन्दर और सजीली!आकर्षक और रंग-रंगीली!! शिवशंकर और साँईबाबा! यहाँ विराजा काशी-काबा!! कृष्ण-कन्हैया अलबेला है! कोई गुरू कोई चेला है!! जग-जननी माँ पार्वती हैं! धवल वस्त्र में सरस्वती हैं!! आदि-देव की छटा निराली! इनकी सूँड बहुत मतवाली!! जो जी चाहे वो...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
बालकविता
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[15 Jun 2010 07:27 AM]



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