सारे पेड़ भागते हैं मेरे पीछे नंगे पांव ...
आज सुबह आपने निज़ार क़ब्बानी की कुछ छोटी छोटी प्रेम कविताएं पढ़ीं. उसी क्रम को बढ़ाते हुए अब पेश हैं इसी कवि की प्रेम कविताओं की अगली किस्त. मैं उम्मीद करता हूं यह इन प्रेम कविताओं की आख़िरी किस्त नहीं होगी. भाषाजब आदमी प्यार करता हैकैसे इस्तेमाल कर सकता...
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Ashok Pande
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[15 Jun 2010 07:36 AM]



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