'तेरी महक.. माँ..'
..."संदूक में लिपटी रखी है..मासूमियत में डूबी..बचपन की सुनहरी..यादों की झड़ी..साथ ले आती हैं..अनगिनत क्षण..वो अपनापन..मीठे आँसू..मीलों फैली मुस्कुराहट..सतरंगी आत्मीयता..ताज़ी है..अब तक..तेरी महक..माँ..!!"......
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Priyankaabhilaashi
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[15 Jun 2010 07:04 AM]



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