दुआ में असर रहे

वीर की कलम से कभी तो दुआ में असर रहे, कभी तो उसकी हम पर नज़र रहे| मैं तोड़ दूंगा सारी बंदिशें सनम, तुझमें साथ चलने का जिगर रहे| कभी तो दुआ में असर रहे… बेखुदी उलझा ले चाहे जितना, तुम्हे जिंदिगी की तो कदर रहे| कभी तो दुआ में असर रहे… पत्थर... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[15 Jun 2010 05:47 AM]

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