PYAAR KI SARITA BAHAAU
चाहता हूँ प्यार की सरिता बहाऊ . विश्व के संग डूबकर उसमे नहाऊ . . दुश्मनी की बात धोखे से नहीं हो . मित्रवत हो मैं गले सबको लगाऊ . . चाहता सुन्दर चमन स्वप्निल सजाऊफुल ही हो फुल जग ऐसा बनाऊ .हो सहज सुख-शांति से परिपूर्ण जीवनकंही दुःख से मुखड़ा मैं न पाऊ . ....
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JEEVAN SANGEET
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[15 Jun 2010 05:28 AM]



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