दोस्ती और धोखा
मेरी तकलीफ की तफसीर में न जा ए दोस्ततू नही समझेगा मेरी तक़दीर की तासीर जिसने हर तबस्सुम के एवज में मुझे ताजिर दी है ये दोष महज लकीरों का नही गुनेहगार हूँ बराबरी की मैं भी खुद की भी औरअपने उन अजीजों की भी जिन्होंने...
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हिमानी
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[15 Jun 2010 03:25 AM]



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