वाह..भाई...वाह...समझ समझ के समझ को समझो......
यहाँ कुछ रचनाएँ प्रस्तुत हैं...ये रचनाएँ मेरी नहीं है कहीं से सुनी गई हैं। रचनाकारों का नाम मुझे याद नहीं पर पठन योग्य हैं।। सादर।।1. समझ समझ के समझ को समझो,समझ समझना भी एक समझ है।समझ समझ के जो न समझे, मेरे समझ में वो ना समझ है। 2. हरि को खोजन हरि गए,...
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प्रभाकर पाण्डेय
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[15 Jun 2010 02:42 AM]



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