मैं लौट कर नहीं आऊंगा
कलएक लम्हा टूटागिरने लगा मैंने लपकापकड़ा हाथ में कहारुक तो ज़रा कहाँ जा रहा है?वो बोला रुक नहीं सकतामुझे तो मिटना हैतुम जी लो जितना जीसकते हो भर लोअंक मेंहर क्षण कोजितना भरसकते होसंजो लोहर ख्वाब कोजितना...
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वन्दना
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[15 Jun 2010 02:00 AM]



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