जवां हो जाने की

वीर की कलम से अहिस्ता रख ज़ख्मों पर हाथ सनम, इनकी तासीर है जवां हो जाने की| शमा-ए-मोहब्बत ना रहेगी उम्र भर, इसकी किस्मत है धुआं हो जाने की| इनकी तासीर है जवां हो जाने की.. हर वक्त क्या ढूँढता है लोगों में तू, तुझे बिमारी है गुमां हो जाने की| इनकी तासीर... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[15 Jun 2010 01:22 AM]

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