गुरु के बाबत
गुरु प्रकाश ही गुरु प्रसादगुरु वह नही जो हाँथ पकड़कररास्तों पे चलायेगुरु ऐसा प्रकाश हैजिस प्रकाश में शिष्य अपनारास्ता ढूंढ लेता है............................... अरुण जहाँ शिष्य वहाँ गुरुजगत में भांति भांति के गुरुउपलब्ध हैंजिसे जैसा चाहिए वैसा मिल जाता...
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Arun Khadilkar
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[15 Jun 2010 00:48 AM]



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