कहने दो ना जिंदिगी

वीर की कलम से वहमों में रहने दो ना जिंदिगी, कहने को कहने दो ना जिंदिगी| ग़मों का दरिया या गिलों की बारिश, हमें हर हाल में बहने दो ना जिंदिगी| कहने को कहने दो ना जिंदिगी… सब दिखता है मेरे अलावा मुझको, मुझे कुछ नए आईने दो ना जिंदिगी| कहने को कहने दो... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[15 Jun 2010 00:57 AM]

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