लालटेन से ज़्यादा ज़रूरी होती है रोशनी

कबाड़खाना अरबी मूल के कवि निज़ार क़ब्बानी की कविताओं से सिद्धेश्वर सिंह पहले ही आपका परिचय करवा चुके हैं. एक पत्रिका के प्रेम-कविता विशेषांक के लिए कविताएं चुनते और अनुवाद करते हुए मेरी निगाह इसी शायर की चन्द छोटी-छोटी प्रेम कविताओं पर पड़ी. तुरन्त अनुवाद करने का... [पूरी पोस्ट]
writer Ashok Pande
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[15 Jun 2010 00:21 AM]

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