आपका इंतज़ार है.
सच बोलो तो संकट में फंसता है प्राणपर झूट के तो नहीं होते है पाँवगुंडागर्दी , चोरी , लूटपाटत्रस्त है देश इन सबसे आजकहाँ है वो जो सुधारेंगे देश कोऐसा ही कुछ लिया था प्रण बढ़ाकर आवेश कोपर ऐसा कुछ हमें द्रष्टव्य न हुआदेश तो और भी पतन की ओर...
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ana
kavita
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[14 Jun 2010 23:50 PM]



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