मानवता के दुश्मन
रात का सन्नाटाअचानक चीख पड़ती हैं मौतेंकिसी ने हिन्दुओं को दोषी मानातो किसी ने मुसलमां कोपर किसी ने नहीं सोचा किन तो ये हिंदू थे न मुसलमांबस मानवता के दुश्मन थे।...
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KK Yadava
कविता
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[14 Jun 2010 22:30 PM]



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