इधर से सुखकर तो उधर से दुखदायी
सुख की आकांक्षा में दुखः का भय हैदुखः की अनुभूति में सुख का चिंतनएक ही अनुभूति -इधर से सुखकर दिखे तोउधर से दुखदायीक्यों न ऐसी जगह से देखेंयह सारा तमाशाजहाँ न हो कोई आशा औरन कोई निराशा............................ अरुण...
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Arun Khadilkar
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[14 Jun 2010 20:50 PM]



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