कैसे मान लूँ बोलो, तो कोई पासबाँ नहीं मेरा...

काव्य मंजूषा ये तस्वीर कनाडा में Banff नेशनल पार्क की है... ये ज़मीं नहीं मेरी, वो आसमाँ नहीं मेराठहरी हूँ जहाँ मैं आज, वो जहाँ नहीं मेराहोगा क्या जुड़ कर भी, उस अनजाने हुज़ूम से  वो लोग नहीं अपने, वो कारवाँ नहीं मेरा बच कर लौट आती हूँ, गज़ब सागर की लहरों से... [पूरी पोस्ट]
writer 'अदा'
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[14 Jun 2010 18:19 PM]

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