तुझसे मिलने की फरियाद करते हैं....:- देव
बंधुओ, आज संध्या की बारिश और ट्राफिक से सम्बंधित कुंठाओ को दरकिनार करते हुए कुछ सार्थक बातचीत की जाए.... कुछ सृजनात्मकता की बात की जाए... कुछ ऐसी बातें हो जो मन को राहत पहुचाये.... और सुकून का एहसास करा जाए...कुछ शब्द... यहाँ वहां जोड़ दिए हैं... कविता...
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देव कुमार झा
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[14 Jun 2010 13:37 PM]



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