पढने का अभाव और लेखन से विरक्ति --- अजीब सी मनोदशा
पूरा दिन गरमी के कारण घर में घुसे रहने के बाद शाम को कुछ बाहर टहलने का मन किया। बाहर निकले भी पर जायें कहाँ यह स्थिति बनी रही, परेशान सा करती रही।कुछ ऐसा ही ब्लॉग लेखन को लेकर हो रहा है। आसपास देखते हैं तो मुद्दों का ढेर दिखता है पर जब लिखने को बैठते हैं...
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डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
बस यूं ही
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[14 Jun 2010 13:27 PM]



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