बचपन को आज भी जरूरत है किताबों की......

भूसे में से निकले कुछ बुध्दिमत्ता पूर्ण तिनके...... अब बच्चे बदल गए है.उन्हें बुक्स में इन्ट्रेस्ट नहीं रहा.वे कम्प्यूटर गेम्स और मूवीज के साथ बचपन गुजार रहे है.जरा सोचिये,ये कितना सही है?कहाँ गए वो दिन,जब स्कूलों में छुट्टियाँ होते ही कॉमिक्स की दुकानों पर भीड़ लगने लगती थी.चंदामामा,नंदन,और पंचतंत्र,की... [पूरी पोस्ट]
writer पुष्कर सिंह
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[11 Jun 2010 15:33 PM]

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