नया सफर है अता कर नई डगर मुझको
जुबाँ के साथ जुबाँ का, मिले असर मुझको तो फिर कहूँ कि मिला है, कोई गुहर मुझको सभी प गर्दिश-ए,-दौरां ने कहर ढाया है कि लग रहा है परेशान, हर बशर मुझकोचली ये कैसी हवाएँ, उजड़ गया सब कुछभरे चमन में कुछ आता, नहीं नज़र मुझकोख़िज़ाँ के आते ही मैं, फिर बिछड़ गई तुमसे...
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प्रकाश टाटा आनन्द
नया सफर
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[01 May 2010 04:57 AM]



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