जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा जी की याद में..
एक दिन मैं अपनी पुरानी डायरियों के पन्ने पलट रही थी कि अचानक मेरे हाथ 1983 की डायरी लगी। मन पुरानी यादों में खो गया। मेरे एक भाई बम्बई में पिताजी के साथ रहते थे और जब भी दिल्ली आते तो रेलवे स्टेशन से ओम प्रकाश शर्मा जी का उपन्यास रास्ते...
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प्रकाश टाटा आनन्द
यादें
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[09 May 2010 06:46 AM]



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