राष्ट्र से विश्वास्घात...
प्रिय साथियों आज सुबह अश्विनी कुमार जी का सम्पादकीय पढ़ा मन को छू गया। भाई गुरूदास जी की एक अद्भुत रचना है, जिसमें इस बात का वर्णन किया गया है कि धरती किसके भार से पीड़ित है। धरती स्वयं पुकार कर कहती है.... "मैं उन पर्वतों के भार से पीडित नहीं हूँ,...
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प्रकाश टाटा आनन्द
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[30 May 2010 08:06 AM]



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