स्वीकार है मुझे लेकिन ......

संयोग-वियोग  अब आगे पढ़िये ..... दिन भर की तू-तू मैं-मैं अब रात के सायों को भी छूने लगी थी। सास-ननद के फैशन बढ़ते जाते हैं, प्रिया की किताबों में सिनेमा की टिकटें और किसी न किसी लड़के की फोटो अक्सर पाई जाती है। संतोष उसकी शिकायत अपने पति से करती है तो उसे... [पूरी पोस्ट]
writer प्रकाश टाटा आनन्द
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[13 Jun 2010 09:25 AM]

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