मैं जहाँ था तुम वहाँ थे, रास्ते सब एक थे... (समाज की विषमताओं की वेदना लिखने वाला कवि और एक हास्य कवि)
शिवम् मिश्र जी ने एक मुहिम शुरू की....ये लिंक्स पढ़े....पहली बरसी पर विशेष :- अश्रुपूरित श्रद्धांजलि और मेरी वह मुराद ............बिन मांगे जो पूरी हुयी !! यह एक सार्थक और भावनात्मक प्रयास है....साहित्य के उन स्तंभों को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी...
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दिलीप
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[14 Jun 2010 11:50 AM]



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