चलो..दूर तलक..
हँस दो एक बार फिर,बादल शायद छंट जाएँ...चाँद निकल आये बदली से,चाँदनी से आँगन नहाये....हुई है बात छोटी सी,और तुम बैठे हों मुंह फुलाए,ऐसा ना हों इस गुस्से में,पूनम अमावस बन जाए...आँखों में हों जिनके सपने,नीर भूलकर ना आ पाए,इन अश्रु की बूंदों से,स्वप्न धूमिल...
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आस्था "देव"
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[14 Jun 2010 11:08 AM]



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