कशमकश !

अंधड़ ! कशमकश बढ़ जाती है खुद-व-खुद,जब कभी उनका हाल नहीं मिलता,अश्क बहाने को जी करता है किन्तु,पोंछ्न्रे को स्वच्छ रूमाल नहीं मिलता !ये जिसने भी कहा, सच ही कहा है किऐनवक्त पर साला कुछ भी काम नहीं आता,थक चुका हूँ सुबह से ट्राई कर-करके,मगर कमबख्त उनका कॉल नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer पी.सी.गोदियाल

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[14 Jun 2010 09:33 AM]

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