आज के कवियों का लेखन निरुद्देश्य है- बोधिसत्व (अंतिम क़िस्त)
(पिछली क़िस्तों में बोधिसत्व ने हिन्दी कविता की परंपरा, उसके कुछ जातीय लक्षणों आदि पर विस्तार से बात की। इस अंतिम क़िस्त में वह इसी रोशनी में पिछले बीस साल की कविता को देखते हैं)(पाँच)तो आज के जो भी कवि लिख रहे हैं उनके लेखन का ऐसा कोई बड़ा उद्देश्य नहीं...
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अशोक कुमार पाण्डेय
कविता
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[14 Jun 2010 09:10 AM]



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