लिखना मुझे भी अच्छा लगता है लेकिन......
जवाब तो मुझे देना था इसलिए सोचा जिस तरह उसे पसंद है वैसे ही जवाब दूं। किसी के ख़त या आजकी जुबान में कहूँ तो मेल इतना परेशां भी कर सकते हैं या यूं कहूँ कि उन में इतनी ताकत हो कि वो परेशान कर सकें, किसी को वाकई सोचने पर मजबूर कर सकें। इस हद तक कि उसे अपना...
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rakhshanda
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[14 Jun 2010 08:57 AM]



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