जंगली होता आदमी

कवितायन शायद, अब बकरियाँ सीख लेंअपने दाँतों को पैना करना और काट लें सड़कों पे भागते आदमी कोशायद,अब मुर्गें भी सीख लें अपने पंजों में जान डालना और पकड़ बनाना मजबूत नाखूनों के सहारे कुछ ऐसी की नोंच सके आदमी का चेहरा जंगल,तो पहले भी महफूज नही था बिल्कुल शायद इसिलिये... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
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[14 Jun 2010 06:01 AM]

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