माँ की याद में [कविता] - सुशील कुमार
दुनिया के टंठों से आजिज आ लौट आऊँगा जब तुम्हारे पास तो गोद में मेरा सिर धर अपनी खुरदरी हथेली से जरा थपकियाना मुझे माँ क्या बताऊँ जब से तुम्हें छोड़ परदेस आया हूँ माँ रोजी कमाने, कभी नींद-भर सोया नहीं! अतिरिक्त......
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[14 Jun 2010 03:30 AM]



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