तलैया

पिनाकपाणि जो भी आता है  कंकर फेंक ,धूर्त नज़रों से तौल  कंधे उचका कर चल देता है  निष्फल उर्मियाँ  आर्त कम्पन दुस्सह ! दीवारें ज़मीन की सीमा की विवश घुटन  दाल दो एक साथ ,सारे पत्थर  चलो सूख ही जाए ,फिर  मन की तलैया |... [पूरी पोस्ट]
writer Pinaakpaani
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[14 Jun 2010 03:39 AM]

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