हमारी भाषा भी स्त्री विरोधी है
मुक्ति का सपना हर मनुष्य देखता है--औरत भी देखती हैङ्ककिन्तु 'मुक्ति' का अर्थ भिन्न-भिन्न सन्दर्भों में जुदाजुदा होता है। अभी भी भारत में ९०% स्त्रियाँ मुक्ति के विमर्श से अनजान हैं। अधिकांश तो अपनी गुलामी का जश्न मनाती दिखती हैं। जो मुक्त हैं या होना...
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Ramnika Foundation
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[14 Jun 2010 02:47 AM]



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