समुन्नति का सूत्र
चंद शब्दों की समिधाथोड़ा सा कल्पना का अक्षतयादों के दो फूल औरमंत्रवत प्रस्तुत संस्कारआओ शब्दों को साधेंसृजन की धूनी रमाएंअपेक्षाओं की पालथी माररचें एक शब्द विधानप्रस्तुत-अप्रस्तुत की जिच छोड़ले लें एक मौन संकल्पकर्तव्यों का होम होता रहे अनवरतसमिधा की...
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घन्नू झारखंडी
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[14 Jun 2010 01:36 AM]



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