नमाज़

Khuda Khair kare तेरे लबों की जुम्बिशों का शिकार हूं ,तेरी ज़ुबां की साजिशों से तार तार हूं।कश्ती तेरी जवानी की फ़िर डगमगा रही,जर्जर बुढापे मे भी मैं तेरा किनार हूंतेरा हवाओं का मकां,मेरी चराग़ों सी तहज़ीब फ़िर भी मिलने को बेकरार हूं।इज़्ज़त तुमहारे कारवां की सब ही करते... [पूरी पोस्ट]
writer ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι

शिकार

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[22 May 2010 21:27 PM]

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