jawani

Khuda Khair kare जवानी जब भी चढती है ,बग़ावत खूब करती है।मुहब्बत की शिलाओं पर ,वफ़ा की परतें जमती हैं।रगों मे दर्द बढ्ता है , निगाहें पानी भरती हैं ।झुलायें, नेकी को कब तक,बदी भी तो मचलती है।समंदर की शराफ़त बस, किनारों तक उमडती है।हसीनों की ज़मानत मे,हवस की लौ भडकती... [पूरी पोस्ट]
writer ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι

bagawat

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[26 May 2010 01:09 AM]

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