सबबे-वफ़ा

Khuda Khair kare दिलों के धड़कने का कुछ तो सबब होगा , गुलों के चटकने क कुछ तो सबब होगा।वफ़ा और तारीख मे है न रिश्ता पर , वफ़ा के बदलने का कुछ तो सबब होगा ।सितम ज़ुल्म बेदार रखती है बग़ावत को , रगों के सुलगने का कुछ तो सबब होगा।शहादत किसे रास आती जवानी में , कि सरहद में मरने... [पूरी पोस्ट]
writer ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι

महफ़िल

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[30 May 2010 20:27 PM]

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