दुश्मने-mulk
कोई रस्ता बचा नहीं है आज, और कुछ सोचना नहीं है आज।क़त्ल मासूमों का बहुत हो चुका, न्याय का पट खुला नहीं है आज।पानी सर से उपर पहुंच चुका है, तिनकों का भी पता नहीं है आज्।उनका ऐलाने-जंग हो चुका पर , अपना जज़्बा दिखा नहीं है आज्।क्यूं सियासत नसमझे मौत का दर्द,...
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ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι
आक्रमण
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[31 May 2010 21:19 PM]



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