मौत की परवाज़

Khuda Khair kare तन्हाई भरी रात मे इक चिड़िये की आवाज़, गो ज़िन्दगी के बादलों में मौत की परवाज़ ।इस दिल के मुकद्दर मे चरागों का मकां जब, क्यूं फ़िक्र करूं आंधियों की,वो रहें नाराज़।मै सरहदों पे दोस्ती की करता हूं बातें , अपनों से लड़ाई का यही है मेरा अन्दाज़ ।तुम जब से अमीरों की... [पूरी पोस्ट]
writer ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι

जांबाज़

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[01 Jun 2010 21:35 PM]

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