रहे मुहब्बत

Khuda Khair kare राहे मुहब्बत दर्द से भरर्पूर है, अब बे-वफ़ाई इश्क़ का दस्तूर है।दिल के समन्दर मे वफ़ा की कश्ती है, आंखों के साग़र को हवस मन्ज़ूर है।ग़म के चमन की रोज़ सजदे करता हूं, पतझ्ड़ के व्होठों मे मेरा ही नूर है।बारिश का मौसम रुख पे आया इस तरह, ज़ुल्फ़ों का तेरा साया भी... [पूरी पोस्ट]
writer ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι

दर्द

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[03 Jun 2010 20:49 PM]

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