तमन्नाओं के बादल
तमन्नाओं के बादल में फ़ंसे हैं हम , हवस में मूंद कर आंखें पड़े हैं हम।ठ्हरता ही नहीं दिल में वफ़ा का जल,दग़ाबाज़ी के चिकने हां घड़े हैं हम।नहीं हसिल है मेहनत की दुवा हमको ,बिना पुख्ता इरादों के चले हैं हम।बिना पतवार कश्ती है समन्दर में , मुकद्दर पे भरोसा कर...
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ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι
चिकने घड़े
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[04 Jun 2010 21:27 PM]



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