बेबसी

Khuda Khair kare दिल तेरे ही ग़मों का तलबगार है अब , दर्द गम बे-बसी से मुझे प्यार है अब।कश्ती-ए-दिल समन्दर मे महफ़ूज़ रहती, खुदगरज़ साहिलों को नमस्कार है अब।क़ातिलों का अदालत से टांका यूं , गोया मक़्तूल खुद ही ग़ुनहगार है अब।मैं चरागों को जला कर सर पे रखा हूं , दिल हवाओं से... [पूरी पोस्ट]
writer ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι

दीन

views
3
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[06 Jun 2010 21:25 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix